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अविनाश वाचस्‍पति

विचारों की स्‍वतंत्र आग ही है ब्‍लॉग

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बाल कृष्‍ण है, बाल कंस नहीं है बालकृष्‍ण

असली डिग्रीधारक असली घोटाले कर सकते हैं। फर्जी डिग्रीधारक को उनका जिक्र करने का भी हक नहीं है। डिग्री असली होगी तो घोटाला भी असली और उचित गुणवत्‍ता का होगा, अधिक सतर्क होकर किया जाएगा। उन सबको भनक न लग रही हो तब भी लगवाई जाएगी, जिनके नाम शामिल होने से बाद में बच निकलने के लिए लाभ मिल सके।

डिग्री असली हो तो सब नकली चलता है क्‍योंकि नकली डिग्री बांटकों और धारकों से बाजार पटा पड़ा है। आजकल शिक्षा ही इतनी महंगी हो गई है कि लगता है एक दिन नकली डिग्रियों को कानूनी मान्‍यता मिल जाए, तो क्‍या आश्‍चर्य। वैसे भी नकली डिग्रीटिंग्स हासिल करना कोई कम जोखिम का कार्य है। असली काम में तो रिस्‍क होता ही नहीं है इसलिए बहुत से जोखिम प्रिय लोग असली का चक्‍कर पालते ही नहीं है। यहां तो डिग्री की बात चल रही है। जहां तक डी एल ड्राइविंग लाइसेंस का सवाल है, नकली डीएल सर्वाधिक चलन में हैं। एक स्‍टेट या पड़ोस के स्‍टेट का तो दिल्‍ली में खूब स्‍मूदली चलता है। डीएल असली हो तो भी उसका रंगीन फोटो लेमिनेशन कराकर लेकर चलने का रिवाज हैं। पकड़े जाने पर वही थमाते हैं, फिर जो खिसक जाते हैं, तो हाथ नहीं आते हैं।

नकली या फर्जी का भविष्‍य बहुत उज्‍ज्‍वल है। अब दूध इतना महंगा हो गया है। आबादी बढ़ गई है इसलिए एक पंथ दो चार काज करना तो आम बात है। महंगा है तो सिंथेटिक दूध बनाने में मोटा मुनाफा है। जिसे पीने से लोगों को बीमारियां होती हैं। डॉक्‍टर और दवाई निर्माता खुश रहते हैं। मरते हैं तो श्‍मशान वाले प्रसन्‍न और आबादी घट रही है इसलिए सरकार प्रसन्‍नमना। अब भला असली शुद्ध दूध से इतनी खुशी मिल सकती है। इसी तरह धन काला पसंद किया जाता है।

मेहनत का धन चाहे टैक्‍स के तौर पर सरकार को बरबाद करने के लिए सौंपने से अच्‍छा है कि काला ही रहे। सफेद करेंगे तो कम हो जाएगा। तीस प्रतिशत तक तो सरकार खा जाएगी और सरकार भी भला कौन से शुद्ध दूध की नहाई है या साफ गंगा के छींटे मुंह पर मारकर आई है। जो उसे ईमानदारी से अपनी मेहनत की कमाई पर डाका डालने दिया जाए।

सरकार के पास भी जाएगा तो वहां पर भी नाम के राजा पर जेब के कंगले डाका डालने पर उतारू मिलेंगे। और जो डाका डालकर तिहाड़ में बैठे हैं, वे सब कुछ भूलने का नाटक करने में पारंगत हो चुके हैं। कभी दिमाग और कभी दिल, जनता को सब पीस रहे हैं समझकर तिल। इसलिए जनता पिसती रहती है पर जनता वो तिल है, जिनमें तेल नहीं है, इसलिए योग करे। एक राज खोलता हूं,  संदेह नहीं पूरा विश्‍वास है कि इस मामले में नकली कुछ नहीं, बस सरकार की नीयत के बारे में जो सरकार का विरोध करने वालों पर चोट कर रहा है।

बाबा ने सरकार से पंगा लिया है तो सरकार उनसे जुड़े लोगों को बलात् नंगा करने पर लगी हुई है। सरकार की नीयत खराब हो चुकी है इसलिए उसकी नियति भी सुरक्षित नहीं रह सकती। अगर ऐसा नहीं है तो  आपको क्‍या लग रहा है कि बालकृष्‍ण, कृष्‍ण नहीं कंस है ?

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13 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

chaatak के द्वारा
August 4, 2011

मैंने तो सुना है कि राहुल बाबा (राल विंसी) की भी डिग्री फर्जी है कुछ दिन पहले नेट पर बाकायदा उनकी फर्जी डिग्री भी देखी है| हिन्दुस्तान में आने के बाद एंटोनिया माइनो ने भी नकली राशन कार्ड के दम पर ही मतदान किया था और बदस्तूर आज तक कर रही हैं बल्कि सांसद भी हैं| इस खानदान का नाम तक नकली है| सबको पता है कि ये नेहरु (अगर ये खानदानी नाम है तो) भी नकली हैं और गांधी भी क्योंकि ये सभी नकली गांधी तो फिरोज के वंशज होने चाहिए| सब गडबड घोटाला है कुछ समझ नहीं आता अगर बालकृष्ण के कृत्य को अपराध कहेंगे तो क्या नेहरु के वंशज भजन गा रहे हैं ? मुझे तो लगता है सारे के सारे सर से पांव तक झूठ से ही बने हैं|
अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    bharodiya के द्वारा
    August 5, 2011

    झूठे भजन गाने का अधिकार सबको नही होता । आप के खानदान की नस नस मे झूठा खून दौडत हुआ होना चाहिए ।
    अरबी नस्ल का नकली घोडा झूठ के पथरिले रास्ते पर खूब भागता है ।

mukesh sinha के द्वारा
July 31, 2011

हर बात पे सरकार को कोसना और संदेह से देखना क्या जरुरी है….

    bharodiya के द्वारा
    August 2, 2011

    कौन सी सरकार ?!!! ये , ये नकली सरकार ?
    सरकार नकली ईस लिये है की हमारे विधायक नकली है । वो ईस लिये नकली है के उसे हमने नही चुने पार्टी के गेन्ग लिडरोने खूद टिकिट दे के चुना है ।
    जरुरी नही की पार्टी मे अच्छे नेता नही होते है, होते है । लेकिन उसे हमारे समने नही रख्खा जाता, बदमाश को ही टिकिट मिलता है । है हमारे पास अच्छे नेता चुनने की चोईस ? अगर एक सीट पर १०-२० नेता एक ही पार्टी के खडे हो जाय तब हम अच्छा नेता ढुन्ढ सकते है, वरना बदमाश को चुनने के अलावा हमारे पास कोइ चारा नही है । जीसे हमने नही चुना है ऐसे लोगो के नाम पर हमे थप्पा मारना पडता है । ऐसे थप्पे को ही लोकशाही समज कर ईतराना हो तो ईतरा सकते हो । मेरी नजर मे ये प्रजा का खुद का चुना हुआ विधायक नही है, आपको मजबूर किया गया है थप्पा मारने ।

sangeeta swarup के द्वारा
July 31, 2011

असली को नकली बनाना भी कितनी मेहनत का काम है और वो सरकार बखूबी कर रही है .. अच्छा व्यंग लेख

vandana gupta के द्वारा
July 31, 2011

सरकार का डर दिख तो रहा है और क्या चाहिये।

UMASHANKAR RAHI के द्वारा
July 31, 2011

आदरणीय
धैर्य रखें समय आने पर जनता असली नकली का अंतर बता देगी

Santosh Kumar के द्वारा
July 31, 2011

अविनाश जी ,सादर नमस्कार
सरकार अपनी ताकत का इस्तेमाल कहाँ कर रही है ??, अब सबको पता चल ही गया होगा,.. तभी तो आतंकी बम फोड़ते हैं और सरकार बाबा -अन्ना के पिछले जन्मों का खाता भी ढूंढ रही है ,.. इस देश में जितना आसान नकली डिग्री लेना है उससे कई गुना ज्यादा आसान असली को नकली साबित करना है ,.. . बहुत अच्छे विचारों के लिए.. हार्दिक आभार

subhashmittal के द्वारा
July 31, 2011

सही कहा आपने डिग्री नकली नहीं है ये ऐसा है की आप जब स्कूटर भी ले कर चलें तो पुलिस वाला कागजों में कोई न कोई कमी निकाल ही देगा सब ठीक भी हैं फिर भी वो कह देगा मैं नहीं मानता तो क्या होगा |इस केस में तो केंद्र सरकार का सि.बी .आई को साफ़ निर्देश है की कोई भी तरीका अपनाओ बस बाबा को लपेटो |

काजल कुमार के द्वारा
July 31, 2011

नकली का एक फ़ायदा और है कि इसकी नकल हो जाने की चिंता नहीं रहती :)

    अविनाश वाचस्‍पति के द्वारा
    July 31, 2011

    बिल्‍कुल दुरुस्‍त फरमाया आपने।

युगल मेहरा के द्वारा
July 31, 2011

सरकार आम जनता को बेवकूफ मान कर चल रही है

    अविनाश वाचस्‍पति के द्वारा
    July 31, 2011

    असल में बना भी वही रही है तो उसे तो सरकार को तो यह मुगालता होगा ही कि आम जनता एक आम की तरह है, जिसे मनमाफिक निचोड़ लो, चूस लो।




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